मंडी में कच्ची पर्चियों का खेल!
मंडी निरीक्षक नरेश कुमार रायकवार निलंबित
निजी स्वार्थ के लिए विभाग को लगाया जा रहा पलीता
299 प्रवेश पर्चियां, 299 अनुबंध और 299 तौल के बीच निजी पर्चियों से चल रहा था कारोबार, हस्तलिखित पर्चियों के जरिए आढ़त प्रथा संचालित होने का खुलासा, कृषि विपणन बोर्ड ने तत्काल प्रभाव से की कार्रवाई
पदमेश अग्रवाल
ग्वालियर,2 नवम्बर। कृषि उपज मंडियों में किसानों की उपज की खरीद-बिक्री के लिए बनाई गई सरकारी व्यवस्था को कुछ कर्मचारियों की कथित लापरवाही और निजी पर्चियों के खेल से किस तरह पलीता लगाया जा रहा है, इसका बड़ा मामला सामने आया है। मंडी प्रांगण में निर्धारित प्रवेश पर्ची और अनुबंध प्रक्रिया को दरकिनार कर साधारण कागजों और व्यापारिक फर्मों की निजी पर्चियों के माध्यम से कारोबार किए जाने तथा प्रतिबंधित आढ़त प्रथा संचालित होने के मामले में मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने सख्त कार्रवाई की है। डबरा कृषि उपज मंडी समिति में पदस्थ मंडी निरीक्षक नरेश कुमार रायकवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध संचालक-सह-आयुक्त राघवेंद्र सिंह द्वारा 2 नवंबर 2026 को जारी आदेश में जांच प्रतिवेदन के आधार पर मंडी निरीक्षक की कार्यप्रणाली और पर्यवेक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आदेश के अनुसार मंडी प्रांगण में प्रांगण प्रभारी एवं नीलामी प्रभारी के दायित्वों का निर्वहन करते हुए निर्धारित मंडी व्यवस्था का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया। इसके चलते निजी एवं हस्तलिखित पर्चियों के माध्यम से कारोबार और आढ़त प्रथा संचालित होने की स्थिति सामने आई।
299 प्रवेश पर्चियां, फिर भी निजी पर्चियों से कारोबार का खेल!
जांच प्रतिवेदन में मंडी के कारोबार से जुड़े आंकड़े भी सामने आए हैं। इसके अनुसार मंडी में कुल 299 प्रवेश पर्चियां, 299 अनुबंध और 299 तौल होना दर्ज किया गया। मंडी में कृषि उपज की कुल आवक 1,296.69 मीट्रिक टन तथा मंडी की आय 6,70,590 रुपए प्रतिवेदित की गई। इसके बावजूद जांच में दोपहर लगभग 12 बजे मंडी प्रांगण में कुछ किसानों की कृषि उपज का व्यापारिक फर्मों के माध्यम से तौल किया जाना पाया गया। यह स्थिति मंडी में निर्धारित प्रक्रिया के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
सरकारी पर्चियों की जगह साधारण कागजों पर चल रहा था हिसाब-किताब
जांच में सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि कुछ किसानों को निर्धारित प्रवेश पर्ची और अनुबंध पर्ची के स्थान पर साधारण कागजों पर हस्तलिखित पर्चियां दी जा रही थीं। वहीं व्यापारिक फर्मों की ओर से मुद्रित निजी पर्चियों का भी इस्तेमाल किया जा रहा था। इन पर्चियों पर कृषि उपज का नाम, भाव और वजन तक दर्ज किया जाता था। इतना ही नहीं, तौल करने वाले व्यक्ति प्रवेश पर्चियों और अन्य पर्चियों को अपने पास रख लेते थे तथा भुगतान के समय वापस करते थे।
इस पूरी प्रक्रिया ने मंडी की पारदर्शी खरीद-बिक्री व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। सरकारी रिकॉर्ड और निर्धारित प्रक्रिया से अलग निजी पर्चियों के जरिए कारोबार किए जाने से आढ़त प्रथा संचालित होने की स्थिति जांच में सामने आई। सवाल यह है कि जब मंडी में किसानों की उपज की खरीद-बिक्री के लिए बाकायदा सरकारी व्यवस्था मौजूद है तो फिर निजी पर्चियों का यह समानांतर सिस्टम किसके संरक्षण में चल रहा था?
प्रांगण प्रभारी और नीलामी प्रभारी की भूमिका पर उठे सवाल
बोर्ड के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रांगण प्रभारी एवं नीलामी प्रभारी के रूप में मंडी निरीक्षक की जिम्मेदारी थी कि कृषि उपज की खरीद-बिक्री, नीलामी, तौल और संबंधित अभिलेखों के संधारण की निर्धारित व्यवस्था का पालन सुनिश्चित कराएं। लेकिन निजी एवं हस्तलिखित पर्चियों के माध्यम से कारोबार और आढ़त प्रथा संचालित होने के मामले में उनका अपेक्षित नियंत्रण और पर्यवेक्षण दिखाई नहीं दिया। आदेश में उनकी भूमिका को संदिग्ध मानते हुए कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही तथा वरिष्ठ कार्यालय के निर्देशों के अनुपालन में कमी को गंभीर माना गया है।
निलंबन के बाद ग्वालियर क्षेत्रीय कार्यालय रहेगा मुख्यालय
मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने मध्यप्रदेश राज्य मंडी बोर्ड सेवा विनियम, 1998 के विनियम 35(1) के तहत डबरा मंडी निरीक्षक नरेश कुमार रायकवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड, आंचलिक कार्यालय ग्वालियर निर्धारित किया गया है। उन्हें सेवा विनियम 1998 के विनियम 36 के तहत नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्राप्त करने की पात्रता होगी। इसका भुगतान कृषि उपज मंडी समिति डबरा द्वारा प्रत्येक माह की 5 तारीख तक आंचलिक कार्यालय ग्वालियर के प्रमाणीकरण के आधार पर किया जाएगा।
अब दूसरे मंडियों की व्यवस्था पर भी उठने लगे सवाल
डबरा मंडी का यह मामला मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता और कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर गंभीर चेतावनी है। किसानों की उपज की खरीद-बिक्री के नाम पर यदि सरकारी प्रक्रिया को दरकिनार कर निजी पर्चियों से कारोबार संचालित होता है तो इससे न केवल मंडी की नियमन व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि सरकारी राजस्व और किसानों के हितों पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है। शिकायतों के आधार पर हुई इस कार्रवाई ने मंडी विभाग के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर ऐसी गतिविधियों पर समय रहते निगरानी क्यों नहीं रखी गई। अब जरूरत है कि अन्य मंडियों में भी प्रवेश पर्चियों, अनुबंध, तौल और मंडी शुल्क से जुड़े रिकॉर्ड का प्रभावी परीक्षण किया जाए, ताकि सरकारी व्यवस्था की आड़ में निजी कारोबार और कथित अनियमितताओं को बढ़ावा देने वालों की जवाबदेही तय हो सके।

