भाजपा का सवाल—कांग्रेस अपने ही नेताओं के बयानों पर जवाब दे; पांच साल बाद भी भाजपा पर आरोप लगाना कितना उचित?
पदमेश अग्रवाल
भोपाल।
मध्यप्रदेश की राजनीति में वर्ष 2020 में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के पतन का मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में है। कांग्रेस लगातार भारतीय जनता पार्टी पर उसकी सरकार गिराने के आरोप लगाती रही है। अब भाजपा ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए उसके ही वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के बयान को आधार बनाकर पलटवार किया है।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी बृज गोपाल लोया ने इस विषय पर कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठाते हुए सज्जन सिंह वर्मा के बयान का उल्लेख किया। भाजपा का रुख है कि वर्ष 2020 की राजनीतिक घटनाओं को लेकर कांग्रेस लगातार भाजपा को निशाने पर लेती रही है, लेकिन इस पूरे प्रकरण पर कांग्रेस को अपने ही नेताओं के बयानों के संदर्भ में भी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा ने उठाए सवाल
मध्यप्रदेश में 2020 में हुए राजनीतिक घटनाक्रम के बाद कमलनाथ सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी और शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी थी। इसके बाद से ही कांग्रेस इस घटनाक्रम के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराती रही है। भाजपा इन आरोपों को खारिज करती रही है और अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा के बयान को सामने रखकर इस मुद्दे पर जवाब दे रही है।
राजनीतिक दृष्टि से यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सत्ता परिवर्तन की उस घटना को लेकर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला अब तक जारी है। भाजपा का पलटवार कांग्रेस के लिए अपने आरोपों के समर्थन में तथ्यों और बयानों को स्पष्ट करने की चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक सवाल: क्या कांग्रेस 2020 में अपनी सरकार के पतन को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर नए सिरे से तथ्यों के साथ अपना पक्ष रखेगी, या यह मुद्दा आगे भी भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बना रहेगा?

