राहुल गांधी की अपनी ही पार्टी के नेता उनके झूठ का पर्दाफाश कर रहे हैं! आशीष अग्रवाल
SIR पर कांग्रेस मंत्री के बयान से भाजपा को मिला राहुल गांधी पर पलटवार का मौका
आशीष अग्रवाल बोले— कर्नाटक में जब SIR को लेकर कोई समस्या नहीं, तो ‘वोट चोरी’ के आरोपों का आधार क्या?
पदमेश अग्रवाल
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कर्नाटक के कांग्रेस मंत्री सतीश जारकीहोली के बयान का हवाला देते हुए राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ अभियान पर सवाल उठाए हैं। अग्रवाल ने इस मुद्दे पर एक वीडियो जारी कर कांग्रेस नेतृत्व के रुख पर निशाना साधा।
अग्रवाल के अनुसार, सतीश जारकीहोली ने कर्नाटक में SIR को लेकर कोई समस्या नहीं होने की बात कही है। साथ ही, मतदाता सूची से हटाई गई प्रविष्टियों के संदर्भ में मृत व्यक्तियों, दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं और एक से अधिक बार पंजीकृत लोगों का उल्लेख किया गया है।
कांग्रेस मंत्री सतीश जारकीहोली ने स्पष्ट किया है: “कर्नाटक में एसआईआर के साथ कोई समस्या नहीं है।” उन्होंने स्वीकार किया कि हटाई गई प्रविष्टियाँ उन लोगों की थीं जिनकी मृत्यु हो गई थी, स्थानांतरित हो गए थे या एक से अधिक बार पंजीकृत थे।
जबकि राहुल गांधी दिल्ली में “वोट चोरी” रैली की तैयारी कर रहे हैं, उनके अपने कर्नाटक मंत्री उस कहानी को ध्वस्त कर रहे हैं जिसे वह बेचने की कोशिश कर रहे हैं!
जब एसआईआर राहुल गांधी के राजनीतिक एजेंडे के अनुरूप नहीं होता, तो वह उस पर हमला करते हैं। जब तथ्य उनके प्रचार को उजागर करते हैं, तो उनके अपने नेता भी उन्हें आईना दिखाने लगते हैं।
भाजपा ने इसी बयान को आधार बनाकर राहुल गांधी के चुनावी प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों पर पलटवार किया है। अग्रवाल का तर्क है कि यदि मतदाता सूची में ऐसे नामों को हटाने की प्रक्रिया नियमानुसार हो रही है, तो उसे राजनीतिक आरोपों के चश्मे से देखने के बजाय तथ्यों के आधार पर परखा जाना चाहिए।
राहुल गांधी जहां ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर दिल्ली में अभियान और रैली की तैयारी कर रहे हैं, वहीं भाजपा इस बयान को कांग्रेस के भीतर मतभेद के संकेत के रूप में पेश कर रही है। पार्टी का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने से पहले मतदाता सूची में संशोधन के कारणों और तथ्यों को सामने रखना जरूरी है।
हालांकि, SIR को लेकर व्यापक विवाद और राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित बयान के मूल संदर्भ तथा निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों का परीक्षण आवश्यक है। फिलहाल, सतीश जारकीहोली के कथित बयान को लेकर भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल खड़े करते हुए चुनावी पारदर्शिता की बहस को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है।

