- मोहन मॉडल से बदली मध्यप्रदेश की औद्योगिक पहचान
अब 55 जिलों में उद्योग पहुंचाने की तैयारी
बदली मध्यप्रदेश की औद्योगिक तस्वीर
निवेश के लिए अब इंदौर-भोपाल नहीं, हर संभाग बना उद्योगपतियों की पहली पसंद!
7 से अधिक रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से निवेश का बड़ा नेटवर्क तैयार, उज्जैन संभाग 94,227 करोड़ के प्रस्तावों के साथ पहले नंबर पर, सागर 64,631 करोड़ के साथ दूसरे स्थान पर
पदमेश अग्रवाल
ग्वालियर,4 नवम्बर। मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास की दिशा और दशा बदलने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिस विकेंद्रीकृत औद्योगिक विकास मॉडल पर काम शुरू किया है, उसके परिणाम अब निवेश प्रस्तावों और औद्योगिक गतिविधियों के रूप में सामने आने लगे हैं। दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद से डॉ. यादव ने प्रदेश को देश के प्रमुख औद्योगिक निवेश केंद्रों में स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। उनकी रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि औद्योगिक विकास को केवल इंदौर और भोपाल जैसे स्थापित औद्योगिक शहरों तक सीमित रखने के बजाय प्रदेश के प्रत्येक संभाग और जिले तक पहुंचाया जाए।
इसी सोच के तहत प्रदेश में संभागवार रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित किए गए। उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, सागर, रीवा, नर्मदापुरम और शहडोल सहित विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित इन निवेश सम्मेलनों ने स्थानीय औद्योगिक संभावनाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के सामने रखने का अवसर दिया। इसके साथ ही मुंबई, अहमदाबाद और कोयंबटूर जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में रोड शो और निवेशक संवाद आयोजित कर मध्यप्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं का प्रचार किया गया।
सरकार के सामने केवल बड़े निवेश प्रस्ताव हासिल करने का लक्ष्य नहीं रहा, बल्कि उन प्रस्तावों को जमीन पर उतारने, रोजगार के अवसर पैदा करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री के कार्यकाल में 3.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों का उल्लेख किया गया है। इनमें से कई परियोजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं, जबकि अनेक पर काम आगे बढ़ रहा है।
उज्जैन बना निवेश का सबसे बड़ा केंद्र, सागर ने भी दिखाई ताकत
संभागवार निवेश प्रस्तावों के आंकड़ों पर नजर डालें तो उज्जैन संभाग ने सबसे मजबूत प्रदर्शन किया है। यहां आयोजित रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में 94,227 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इस आंकड़े के साथ उज्जैन संभाग प्रदेश में पहले स्थान पर रहा।
दूसरे स्थान पर सागर संभाग रहा, जहां लगभग 64,631 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव सामने आए। यह उपलब्धि बताती है कि बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र में भी औद्योगिक विकास की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं और उचित अवसर तथा निवेशकों को प्रोत्साहन मिलने पर यहां भी उद्योगों का विस्तार हो सकता है।
इन दोनों संभागों के प्रदर्शन ने यह स्पष्ट किया है कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश की संभावनाएं केवल पारंपरिक औद्योगिक केंद्रों तक सीमित नहीं हैं। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्ध भूमि, संसाधन, कृषि आधारित उद्योग, खनिज संपदा, मानव संसाधन और बेहतर कनेक्टिविटी निवेशकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं।
सात संभागों से शुरू हुई पहल, अब सभी जिलों तक उद्योग पहुंचाने की तैयारी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की औद्योगिक नीति का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि प्रदेश के 55 जिलों को औद्योगिक विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक जिले की स्थानीय विशेषताओं और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर वहां उद्योगों की स्थापना के अवसर विकसित किए जाएं।
इसी क्रम में सभी 10 प्रशासनिक संभागों को निवेश सम्मेलनों और औद्योगिक संवाद की प्रक्रिया से जोड़ने की पहल की गई है। अब सरकार का अगला लक्ष्य सभी जिलों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) इकाइयों के लिए भूमि उपलब्ध कराने का है। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार, आगामी दो महीनों में सभी जिलों में एमएसएमई इकाइयों के लिए भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाना है।
निवेश प्रस्तावों से आगे बढ़कर धरातल पर परियोजनाएं उतारने की चुनौती
औद्योगिक निवेश के मामले में किसी भी सरकार की सफलता का वास्तविक पैमाना केवल एमओयू और निवेश प्रस्तावों की संख्या नहीं, बल्कि उनके आधार पर स्थापित होने वाले उद्योग, वास्तविक पूंजी निवेश और पैदा होने वाले रोजगार होते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने भी अब यही महत्वपूर्ण लक्ष्य है कि निवेशकों के साथ हुए समझौतों को समयबद्ध तरीके से औद्योगिक परियोजनाओं में बदला जाए।
इसके लिए निवेशकों को भूमि, बिजली, पानी, सड़क, परिवहन, प्रशासनिक स्वीकृतियों और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना अहम होगा। सरकार की ओर से संभागवार निवेश सम्मेलनों के माध्यम से जो माहौल तैयार किया गया है, उसे स्थायी औद्योगिक गतिविधियों में बदलने की दिशा में प्रयास जारी हैं।
मोहन यादव की सोच : विकास का लाभ प्रदेश के हर हिस्से तक पहुंचे
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की औद्योगिक विकास की सोच का मूल आधार क्षेत्रीय संतुलन है। उनका प्रयास है कि प्रदेश के किसी भी जिले को विकास की दौड़ में पीछे नहीं रहना पड़े। उज्जैन से लेकर ग्वालियर, बुंदेलखंड से लेकर विंध्य और महाकौशल तक निवेश की संभावनाओं को तलाशना इसी रणनीति का हिस्सा है।

