दाल बाजार में कारोबारियों की जमा-पूंजी पर संकट!
सुरक्षित भंडारण के लिए बने शीतगृहों पर ही उठ रहे सवाल
कहीं माल गायब होने की शिकायत, कहीं बढ़े भाव का फायदा लेने से व्यापारी वंचित,
लाखों के नुकसान और भुगतान को लेकर विवादों की चर्चाएं, व्यापारिक संस्थाओं की भूमिका पर भी सवाल
पदमेश अग्रवाल
ग्वालियर। शहर के प्रमुख व्यापारिक केंद्र दाल बाजार में कारोबारियों के बीच शीतगृहों में रखे माल की सुरक्षा, समय पर डिलीवरी और भुगतान को लेकर चर्चाएं एक बार फिर तेज हो रही हैं। सूत्रों के हवाले से सामने आ रही शिकायतों के मुताबिक, कुछ शीतगृह संचालकों और कारोबारियों के बीच माल की वापसी, भंडारण शुल्क तथा नुकसान की भरपाई को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। व्यापारिक हलकों में इन मामलों को लेकर चिंता है कि जिस व्यवस्था का उद्देश्य व्यापारियों की जमा-पूंजी और माल को सुरक्षित रखना है, कहीं वही व्यवस्था कुछ मामलों में उनके लिए परेशानी का कारण तो नहीं बन रही?
दाल बाजार जैसे बड़े व्यापारिक केंद्र में व्यापारी अपनी पूंजी लगाकर जीरा, इलायची, हल्दी, धनिया और दूसरे कीमती माल को सुरक्षित रखने के लिए वेयरहाउस और शीतगृहों का सहारा लिया जाता है। इसके एवज में व्यापारी निर्धारित किराया, बीमा संबंधी राशि और अन्य सहमत शुल्क भी चुकाते हैं। उनकी अपेक्षा रहती है कि जरूरत पड़ने पर उन्हें अपना माल सुरक्षित और समय पर वापस मिल जाएगा, ताकि बाजार में तेजी आने पर उसे बेचकर कारोबार में मुनाफा कमाया जा सके।
लेकिन व्यापारिक सूत्रों के मुताबिक, कुछ मामलों में माल की डिलीवरी के समय ऐसी परिस्थितियां सामने आने की चर्चा है, जिनसे कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाने की आशंका पैदा हुई। यदि किसी व्यापारी का माल भंडारण के दौरान उपलब्ध नहीं होता, उसकी वापसी में अनावश्यक अड़चन आती है अथवा अतिरिक्त रकम की मांग को लेकर विवाद खड़ा होता है, तो व्यापारी के सामने अपनी पूंजी बचाने की चुनौती खड़ी हो जाती है। यही वजह है कि शीतगृहों की कार्यप्रणाली और व्यापारियों के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
1700 रुपये किलो की इलायची, भाव 2500 रुपये पहुंचने पर डिलीवरी को लेकर विवाद!
व्यापारिक सूत्रों के हवाले से एक कारोबारी का मामला भी चर्चा में है। नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर संबंधित व्यापारी के बारे में बताया गया कि उसने करीब एक से डेढ़ वर्ष पहले एक शीतगृह में हरी इलायची रखी थी। उस समय इलायची का भाव लगभग 1700 रुपये प्रति किलो बताया गया। बाद में बाजार में इसके भाव बढ़कर करीब 2500 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की बात कही गई।
सूत्रों के मुताबिक, जब व्यापारी बढ़े हुए भाव का लाभ लेने के उद्देश्य से अपना माल वापस लेने शीतगृह पहुंचा, तो कथित तौर पर उसे माल चोरी हो जाने की बात बताई गई। व्यापारी ने इस पर आपत्ति जताते हुए माल वापस देने की मांग की। आरोप है कि इसके बाद उसे कोल्ड संचालक द्वारा 1700 रुपये प्रति किलो के हिसाब से रकम लौटाने का विकल्प बताया गया। साथ ही जीएसटी और शीतगृह में माल रखने के बकाया शुल्क को लेकर भी भुगतान की बात सामने आई।
इस पूरे मामले की स्वतंत्र दस्तावेजी पुष्टि उपलब्ध नहीं होने के कारण आरोपों की आधिकारिक पुष्टि किया जाना शेष है। हालांकि, यदि घटनाक्रम इसी प्रकार हुआ है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि व्यापारी को उसके माल की वास्तविक स्थिति, भंडारण रिकॉर्ड और कथित नुकसान का स्पष्ट हिसाब क्यों नहीं दिया गया? माल की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी और नुकसान की भरपाई किस आधार पर तय की जानी चाहिए थी?
1700 रुपये और 2500 रुपये प्रति किलो के भाव के बीच 800 रुपये प्रति किलो का अंतर है। ऐसे में यदि व्यापारी को अपेक्षित माल नहीं मिलता, तो उसे मूल पूंजी के साथ संभावित कारोबारी लाभ से भी वंचित होना पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक नुकसान का आकलन माल की मात्रा, अनुबंध, भुगतान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।
जीएसटी के नाम पर कथित अतिरिक्त वसूली की चर्चा
दाल बाजार के व्यापारिक हलकों में यह आरोप भी चर्चा में है कि कुछ मामलों में शीतगृहों में रखे माल की वापसी के समय व्यापारियों से अतिरिक्त रकम मांगे जाने और जीएसटी विभाग की कार्रवाई का डर दिखाए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। सूत्रों का दावा है कि कुछ व्यापारी अपने कारोबार के दस्तावेजों और माल के स्वामित्व से जुड़े सवालों के कारण खुलकर विरोध करने से बचते हैं।
हालांकि, इन आरोपों के आधार पर सभी शीतगृह संचालकों को एक ही श्रेणी में रखना उचित नहीं होगा। शहर में संचालित सभी शीतगृहों की कार्यप्रणाली पर सवाल नहीं हैं। लेकिन यदि किसी प्रतिष्ठान में अनुबंध से बाहर रकम मांगी जाती है, माल की स्थिति स्पष्ट नहीं की जाती अथवा कर संबंधी नियमों को लेकर अनुचित दबाव बनाया जाता है, तो संबंधित मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
जीएसटी से जुड़े किसी भी दावे की वैधता वास्तविक लेन-देन, बिल, कर नियमों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ही निर्धारित की जा सकती है। इसलिए व्यापारियों की शिकायतों के साथ-साथ संबंधित दस्तावेजों की जांच और जिम्मेदार पक्षों का जवाब भी जरूरी है।
कुछ समय पूर्व एक कोल्ड स्टोर में आग लगने के मामले में भी भुगतान को लेकर चर्चा
व्यापारिक सूत्रों के मुताबिक, दाल बाजार की प्रतिष्ठित फर्म के कोल्ड स्टोर में आग लगने के बाद माल के नुकसान को लेकर भी विवाद की चर्चा रही है। सूत्रों का दावा है कि इस घटना से प्रभावित कुछ व्यापारियों को अब तक उनकी रकम अथवा माल की भरपाई नहीं मिल पाई है। वहीं, बीमा कंपनी से नुकसान की भरपाई होने की बात भी व्यापारिक हलकों में कही जा रही है।
इन दावों की पुष्टि के लिए बीमा भुगतान के दस्तावेज, नुकसान का आकलन, प्रभावित व्यापारियों की सूची और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना आवश्यक है। केवल बीमा राशि मिलने की चर्चा से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वह रकम किन मदों में और किसे दी गई।
सूत्रों के अनुसार, कुछ समय पहले प्रभावित व्यापारी दाल बाजार स्थित प्रतिष्ठान पर अपना पैसा अथवा माल वापस मांगने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें अपेक्षित समाधान नहीं मिल सका।
व्यापारिक संस्थाओं की भूमिका पर उठ रहे सवाल
दाल बाजार व्यापार समिति और मध्य प्रदेश चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री जैसी प्रमुख संस्थाओं का उद्देश्य व्यापारियों के हितों की रक्षा करना, विवादों के समाधान में सहयोग देना और कारोबार के अनुकूल वातावरण बनाए रखना भी है। ऐसे में व्यापारिक हलकों में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब व्यापारियों और शीतगृह संचालकों के बीच माल की वापसी तथा भुगतान को लेकर विवाद सामने आते हैं, तो उनके समाधान के लिए कितनी प्रभावी पहल की जाती है।
सूत्रों का आरोप है कि कई मामलों में संस्थाओं की सक्रियता शिकायत मिलने के बाद ही दिखाई देती है। व्यापारियों के बीच यह चर्चा भी है कि यदि किसी मामले में दोनों पक्ष संस्थाओं से जुड़े हों, तो निष्पक्ष मध्यस्थता और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
महाकाल कोल्ड स्टोरेज प्रकरण का भी हुआ था उल्लेख
व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, पूर्व में दाल बाजार व्यापार समिति के समक्ष जय दिगवानी नामक व्यापारी से जुड़ा एक मामला भी आया था। बताया जाता है कि उस समय समिति के अध्यक्ष दिलीप पंजवानी ने मामले में हस्तक्षेप किया था। सूत्रों के मुताबिक, महाकाल कोल्ड स्टोरेज के संचालक महेश अग्रवाल के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई भी कराई गई थी।
सवाल यह है कि यदि किसी मामले में कार्रवाई संभव हुई थी, तो अन्य शिकायतों के समाधान के लिए भी ऐसी ही पारदर्शी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जाती?
अध्यक्ष के आश्वासन के बाद भी समाधान का इंतजार?
कुछ समय पूर्व दाल बाजार स्थित एक कोल्ड संचालक के ऑफिस पर प्रकरण को लेकर व्यापारिक हलकों में यह चर्चा भी रही है कि दाल बाजार व्यापार समिति के अध्यक्ष दिलीप पंजवानी ने प्रभावित व्यापारियों के साथ खड़े रहने और उनका माल अथवा पैसा वापस दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास करने का भरोसा दिया था। सूत्रों के अनुसार, इस आश्वासन के बाद भी कुछ प्रभावित व्यापारी समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
यदि यह स्थिति दस्तावेजों से प्रमाणित होती है, तो समिति को सामने आकर स्पष्ट करना चाहिए कि मामले में अब तक क्या प्रयास किए गए।
शीतगृह कारोबार में पारदर्शिता के लिए बने ठोस व्यवस्था
दाल बाजार के कारोबारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि माल सुरक्षित रखने के लिए शुल्क देने के बावजूद यदि उसकी वापसी को लेकर अनिश्चितता बनी रहे, तो वे अपने कारोबार की योजना कैसे बनाएं? शीतगृह में माल रखने वाले व्यापारी को यह भरोसा होना चाहिए कि उसकी जिंस का रिकॉर्ड सुरक्षित है, भंडारण की शर्तें स्पष्ट हैं और किसी विवाद की स्थिति में निष्पक्ष सुनवाई होगी।
व्यापारिक विशेषज्ञों की राय में शीतगृहों में जमा माल की डिजिटल सूची, नियमित स्टॉक मिलान, स्पष्ट भंडारण अनुबंध, बीमा संबंधी शर्तों का लिखित विवरण और शिकायतों के समयबद्ध निपटारे की व्यवस्था इस तरह के विवादों को कम करने में मदद कर सकती है। साथ ही, संबंधित विभागों को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली शिकायतों की जांच करनी चाहिए और दोष प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
यह भी ध्यान रखना होगा कि हर विवाद में धोखाधड़ी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आग, चोरी, बीमा विवाद, भुगतान में देरी और अनुबंध की शर्तों को लेकर मतभेद अलग-अलग परिस्थितियां हो सकती हैं। प्रत्येक मामले की जांच तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर ही होनी चाहिए।
व्यापारिक भरोसा ही दाल बाजार की असली पूंजी है। हालांकि सभी शीत ग्रह एवं वेयर हाउस में ऐसा नहीं हो रहा कुछ शीत ग्रह संचालकों के कारण सभी पर उंगलियां उठती है। लेखक का उद्देश्य किसी को बदनाम करना नहीं अपितु व्यवस्था को सामने लाना और पीड़ित व्यापारियों को न्याय दिलाना है।
विशेष नोट:- किसी भी व्यापारी के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी होती है तो वह समस्त दस्तावेजों के साथ मुझसे संपर्क कर सकता है में हर संभव सहयोग करने का प्रयास करूंगा। मोबाइल एवं लेखक किसी भी आरोपों की पुष्टि नहीं करता सूत्रों से उपलब्ध जानकारी के आधार पर खबर प्रकाशित की जा रही है, कोई भी व्यापारी या व्यक्तिजो इन परेशानियों को फेस कर रहा हो मुझसे समस्या दस्तावेजों के साथ संपर्क कर सकता है।
(पदमेश अग्रवाल पत्रकार 9770662121)

